पलायन पीड़ा प्रेरणा (मयंक पाण्डेय )
पलायन पीड़ा प्रेरणा आपदाएं बताकर नहीं आती, और जब आती हैं तो जहाँ अपनी उपस्थिति से जनजीवन को तहस नहस कर देती हैं वहीँ जाते जाते भी हमारे मन मष्तिष्क पर कटु और दुखद स्मृतियों की ऐसी छाप छोड़ जाती है जो समय के साथ धुंधली भले पड़ जाए, उनकी टीस ताउम्र बनी रहती है | ऐसा ही विश्वव्यापी आपदा का समय रहा कोरोनाकाल जिस दौर के आँखों देखे और जीवंत अनुभवों में रची बसी है मयंक पाण्डेय की पहली लेकिन सशक्त और संग्रहनीय किताब “पलायन पीड़ा प्रेरणा” | सशक्त इसलिए कि जब इतिहास के लिए सबकुछ समेटना आसान नहीं होता तब साहित्य उसके सहायक की भूमिका में आगे आता है और मयंक की यह किताब उस कसौटी पर खरी उतरने योग्य है तथा संग्रहनीय इसलिए कि इसमें बहुत कुछ ऐसा है जिसे यादों में संजोये रखने और उससे ताउम्र कुछ सीखने के लिए इस किताब का आपकी बुक शेल्फ पर होना जरूरी है | वर्तमान में सूरत में संयुक्त आयकर आयुक्त के पद पर कार्यरत मयंक जी का जन्म उत्तर प्र...